तिथि के लिए हर पर्व की तरह इस बार होली की तिथि पर भी असमंजस है। होली पर इस बार ग्रहण पड़ रहा है तो ऐसे में ज्योतिषाचार्य एक दिन पहले यानी दो मार्च को ही होलिका पूजन करने की बात कह रहे हैं। वहीं, कई ज्योतिषाचार्य तीन मार्च को तड़के होलिका दहन करने का तर्क दे रहे हैं। इसके बाद एक दिन खाली रहेगा और चार मार्च को रंगोत्सव मनाया जाएगा।

काफी साल बाद ऐसा हो रहा है कि पूजन और होली के पर्व में एक दिन का फासला हो रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पूर्णिमा तिथि इस बार दो मार्च की शाम 5:56 बजे शुरू होगी और तीन मार्च की शाम 5:08 बजे समाप्त होगी। तीन मार्च को चंद्रग्रहण भी रहेगा जो फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि पर लगेगा। शास्त्रों के अनुसार, विधान है कि जिस दिन प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि लगती है तब ही होलिका दहन किया जाता है।
आचार्य डॉ. सुशांत राज ने बताया कि होलिका दहन भद्रा मुख में नहीं किया जाता। दो मार्च को शाम 6:22 बजे से रात 8:53 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा। इस दौरान भद्रा भी रहेगी लेकिन भद्रा मुख नहीं होगा। ऐसे में दो मार्च की शाम को होलिका दहन करना दोष मुक्त रहेगा।
आचार्य पवन पाठक बताते हैं कि तीन मार्च की प्रदोष बेला में होलिका दहन किया जा सकता था लेकिन चंद्रग्रहण होने के कारण ग्रहण नियम लागू होगा। शास्त्र में स्पष्ट है कि यदि चंद्रग्रहण है तो भद्रा रहित पूर्णिमा में रात्रि में होलिका दहन किया जाए।
यदि अगले दिन ग्रस्तोदय ग्रहण हो तो पूर्व दिवस में ही भद्रा त्यागकर रात्रि के चतुर्थ याम या विष्टिपुच्छ काल में होलिका दहन करना चाहिए। ऐसे में होलिका दहन तीन मार्च की सुबह 5:29 बजे से लेकर सूर्योदय से पहले तक किया जा सकेगा। दो मार्च को भद्रा शाम 05:56 बजे से शुरू होकर तीन मार्च को सुबह 05:28 बजे तक रहेगी।
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, होलिका पूजन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि की शाम या प्रदोष काल में किया जाता है और रंगोत्सव का पर्व अगले दिन यानी चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है।