राज्य में जल संकट से जूझते जिले की बात होती है, तो पहले पौड़ी गढ़वाल का जिक्र आता है। तमाम योजनाओं का खाका खींचने और हर घर जल पहुंचाने के दावों के बीच प्रत्येक दिन ग्रामीण क्षेत्रों में ही 40 एमएलडी के सापेक्ष 35 एमएलडी (50 लाख लीटर कम) आपूर्ति हो रही है।

पौड़ी, लैंसडौन जैसे शहरी क्षेत्रों में भी समस्या बरकरार है। सरकारी चौखटों तक पहुंचने वाली हर तीसरी शिकायत भी पेयजल से जुड़ी हुई है। हालात कुदरत की मार से और बिगड़े हैं। यहां पर बरसात रूठी हुई है, पिछले साल ही पूरे राज्य में सबसे कम बारिश पौड़ी जिले में हुई है। पौड़ी में जल संकट को लेकर गीत तक बने हैं। पौड़ी जिले में जल संकट को लेकर अमर उजाला के विजेंद्र श्रीवास्तव की रिपोर्ट।
देवप्रयाग से पौड़ी की तरफ बढ़ते ही कई सूखे हैंडपंप इलाके में पानी की कमी की गवाही देने लगते हैं। अलकनंदा नदी पर टिहरी और पौड़ी जिले को जोड़ने वाला पुल खत्म होते ही कुछ दूरी पर ऐसा ही हैंडपंप दिखाई देता है। इसी तरह पयाल गांव से लेकर पौड़ी और पौड़ी से लेकर खिर्सू मार्ग पर कई सूखे हैंडपंप दिखाई देते हैं।